श्रावण मास एवं रुद्राभिषेक का महत्व

श्रावण मास हिंदू पंचांग का पाँचवा महीना है, जो वर्षा ऋतु में आता है और भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
मान्यता है कि इस मास में भगवान शिव की पूजा-अर्चना का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है, विशेषकर रुद्राभिषेक जैसी पूजा का।
श्रावण के प्रत्येक सोमवार को विशेष रूप से शुभ माना जाता है, और अनेक श्रद्धालु इस दौरान षोडश सोमवार व्रत भी प्रारंभ करते हैं।
त्र्यंबकेश्वर में श्रावण मास के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा हेतु आते हैं। यदि आप इस दौरान पूजा करवाने की योजना बना रहे हैं, तो अत्यधिक भीड़ को देखते हुए कम से कम 3-4 सप्ताह पूर्व बुकिंग करवाना उचित रहेगा।
श्रावण मास में रुद्राभिषेक के साथ-साथ काल सर्प दोष पूजा एवं महामृत्युंजय जाप जैसी पूजाएँ भी विशेष फलदायी मानी जाती हैं।
ब्लॉग

काल सर्प दोष: भ्रांतियाँ बनाम वास्तविकता
काल सर्प दोष को लेकर समाज में अनेक भ्रांतियाँ प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इस दोष से जुड़े सामान्य मिथकों की वास्तविकता क्या है।

नारायण नागबली, त्रिपिंडी श्राद्ध एवं पितृ दोष पूजा में अंतर
ये तीनों पूजाएँ पितरों से संबंधित हैं, परंतु इनका उद्देश्य एवं विधि अलग-अलग है। आइए समझते हैं इनके बीच का सूक्ष्म अंतर।

त्र्यंबकेश्वर कैसे पहुँचें — संपूर्ण यात्रा मार्गदर्शिका
नासिक से त्र्यंबकेश्वर की दूरी, यातायात के साधन, ठहरने की व्यवस्था एवं पूजा के लिए यात्रा की योजना कैसे बनाएँ — जानिए संपूर्ण जानकारी।